हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, यह हदीस किताब "ग़ेरर उल हिकम" से ली गई है। हदीस का पाठ इस प्रकार है:
قال الامام العلی علیہ السلام:
لَا وِزْرَ أَعْظَمُ مِنْ وِزْرِ غَنِیٍّ مَنَعَ الْمُحْتَاجَ.
इमाम अली अलैहिस्सलाम ने फरमाया:
"उस धनवान व्यक्ति के गुनाह से बड़ा कोई गुनाह नहीं है, जो किसी जरूरतमंद को उसके अधिकार से वंचित कर दे।"
ग़ेरर उल हिकम, हदीस 10738
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